“सत्यमेव जयते से फैला सत्य का प्रकाश”

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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के भांडुप वेस्ट सेवाकेंद्र की ओर से १ अक्तूबर २०१७ को जैनम हॉल में  ‘सत्यमेव जयते’ इस विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बी. के. ब्रिजमोहन भाई , प्रमुख अतिथि के रूप में विश्वविख्यात शास्त्रीय गायक डॉ पंडित अजय पोहनकर, सन्माननीय अतिथि के रूप में नवशक्ती के संपादक मा. सुकृत खांडेकर, फिल्म निदेशक मा. नरेंद्र मुधोलकर, फिल्म निर्माता संदीप राक्षे सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

आदरणीय भ्राता बी.के. ब्रिजमोहन भाईजी ने (अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज) अ​​पने उद्बोधन में कहा कि, एक समय हम सभी सत्य की दुनिया सतयुग के वासी थे।हर मानव के अंदर सदाचार और सत्यता थी। अब कलियुग में सब जगह झूठ का ही बोलबाला है। कोर्ट में गीता के ऊपर हाथ रखकर भी झूठी कसम उठाते है।इस दुनिया की सत्यता की गहराई गायब नहीं होती,तो इसको मृत्यु लोक नहीं कहा जाता। हम सभी जानते है की, इस समय की दुनिया को मृत्यु लोक कहते है इसका मतलब है कि, कभी यह दुनिया अमरलोक थी जिसको सतयुग के नाम से जाना जाता है।
सत्य की परिभाषा स्पष्ट करते हुये उन्होने कहा कि,सत्य उसे कहा जाता है जो पहले था,आज है और कल भी रहेगा।भगवतगीता में आत्मा के बारे में लिखा है कि, आत्मा अजर-अमर, अविनाशी है जिसे तलवार से काटा नही जा सकता,पानी से भीगोया नही जा सकता,आग से जला नही सकते। लेकीन विडंबना तो यह है कि,शरीर जो विनाशी है उसे खुद समज बैठे हैऔर आत्मा जो इस शरीर को चलानेवाली चेतन शक्ति है उसे भूल गये है।हम शरीर के लिये सारी जिंदगी भर मेहनत करते है लेकिन आत्मा की उन्नती के लिये कुछ भी नही करते।जीवन की सभी समस्याओ से मुक्त होने के लिये उन्होने अनुरोध किया कि, हम आत्मा के प्रेम .सुख ,शांति,आनंद इन वास्तविक स्वरुपो में स्थित हो सर्वशक्तिवान परमात्मा को याद करे।
डॉ पंडित अजय पोहनकर (विश्वविख्यात शास्त्रीय गायक): उन्होने अपने विचार वक्त करते हुये कहा कि, मै इस कार्यक्रम में आकर अपने आप को भाग्यवान महसूस कर रहा हू। प्रमुख वक्ता बी.के.ब्रिजमोहन भाईजी ने सत्यमेव जयते विषय पर किया हुआ व्याख्यान सिर्फ तालीयों के लिये नही बल्की सत्य की राह पर चलने के लिये पथप्रदर्शक है।सत्य के साथ क्षमा भाव भी बहुत बडा गुण है।प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विदयालय में भी सभी को क्षमा करने की शिक्षा दी जाती है।कार्क्रम में उन्होंने एक गीत गाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
१. मा.सुकृत खांडेकर (संपादक, नवशक्ती )जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि,आज संसार में झुठ ही झुठ है। ऐसे में ब्रह्माकुमारी संस्था के द्वारा इस तरह का कार्यक्रम करना प्रशंसनीय है। ये लोग बिना किसी अपेक्षा के समाज परिवर्तन के निरंतर कार्यरत है।उन्होने आगे कहा कि, इनके कार्य को देखते हुये मैने अपने नवशक्ती समाचार पत्र में ‘चैतन्य साधना’ नाम से लेख प्रकाशित करने शुरू किये है।
2.मा.नरेन्द्र मुधोलकरजी ने (क्रिएटिव हेड,फिल्म एव टेलीविजन सीरियल) ने अपने जीवन के अनुभव बताते हुये कहा कि,मै बचपन में बहुत ही झुठ बोलता था,जिसके कारण झुठ को साबित करने फिर झुठ बोलना पडता था.लेकीन एक बार मैने मुलाकात में सच बताया तो मुझे सहाय्यक निदेशक के लिये चुना गया।
३. मा.संदीप राक्षेजी ने (फिल्म निर्माता ) नेअपनी ब्राह्मकुमारीज मुख्यालय माउंट आबू की यात्रा का अनुभव सुनाया और सभी को एक बार माउंट आबू का दर्शन करने के लिये कहा।
मुलुंड सबझोन संचालिका बी के गोदावरी दीदी ने अपने आशीर्वचन से सभी को लाभान्वित किया।
भांडुप वेस्ट सेंटर संचालिका बी.के. लाजवंती बहनजी ने कार्यक्रम का उद्देश्य एवं सभी मेह्मानों का शब्दों से स्वागत किया।
बी.के.बिंदिया ने (राजयोग शिक्षिका, ठाणे सेवाकेंद्र ) सभी को राजयोग की गहन अनुभूति करायी।